बोकारो : ई-पासपोर्ट सेवा का ट्रायल सफल

बोकारो : सेक्टर टू सी निवासी विकास कुमार ठाकुर ने पासपोर्ट के लिये आवेदन दिया और महज बीस मिनट के अंदर बोकारो एसपी वाइएस रमेश उनके घर पहुंच गए। घर पर ही डॉक्यूमेंट की जांच की और आवेदक के सामने ही रिपोर्ट पासपोर्ट कार्यालय भेज दिया।

अब पासपोर्ट के लिए पुलिस जांच प्रक्रिया का बीस दिन तक आवेदकों को इंतजार नहीं करना होगा। आवेदकों को अब अपने पुलिस वेरीफिकेशन का पता लगाने के लिए थानों का चक्कर भी नहीं लगाना होगा। पुलिस खुद आवेदक के घर टैब लेकर पहुंचेगी और जांच प्रक्रिया पूरी कर ऑनलाइन जांच रिपोर्ट भी पासपोर्ट कार्यालय को आवेदक के घर से ही भेज देगी। ई-पासपोर्ट सेवा का ट्रायल शनिवार को सफल रहा। एसपी वाईएस रमेश खुद सेक्टर दो सी निवासी विकास कुमार ठाकुर नामक आवेदक के घर पहुंचे। आवेदक से जरूरी जानकारी लेकर एसपी ने पुलिस जांच प्रक्रिया पूरी की और आवेदन पासपोर्ट कार्यालय भेज दिया। सबकुछ ठीकठाक रहा तो ई पासपोर्ट के मामले में राज्य का पहला जिला बोकारो बनेगा।प्रक्रिया का उद्घाटन जनवरी में मुख्यमंत्री कर सकते हैं। उद्घाटन के बाद यह पहले चरण में शहरी इलाके में लागू होगा।

वर्तमान सिस्टम में पासपोर्ट कार्यालय जांच के लिए आवेदकों का आवेदन एसपी कार्यालय में कार्यरत विदेशी शाखा में भेजता है। विदेशी शाखा से जांच के कागजात संबंधित थानों में किसी पुलिसकर्मी के माध्यम से भेजा जाता है। थानों में मुंशी कागजात लेते हैं और थानेदार के सामने प्रस्तुत करते हैं। थानेदार किसी दारोगा स्तर के अधिकारी को जांच का जिम्मा सौंपते हैं। जांच का जिम्मा जिन्हें दिया जाता है वह अफसर आवेदक के घर जाते हैं और पूरी जानकारी लेकर कागजात भरते हैं। इसी माध्यम से फिर से विदेशी शाखा में पासपोर्ट का आवेदन जांच प्रक्रिया पूरी कर वापस आता है। विदेशी शाखा इसे पासपोर्ट कार्यालय भेजती है।

सीधे थाने के अफसर को मिलेगा जांच का जिम्मा नये सिस्टम में जिलों से थानों में पदस्थापित वैसे पुलिस अफसरों के नाम की सूची पासपोर्ट कार्यालय को भेजी जाएगी जो इस तकनीक में दक्ष हैं या प्रशिक्षण लिए हुए हैं।

पासपोर्ट कार्यालय सीधे थाने में संबंधित अफसर के पास ऑनलाइन जांच के लिए आवेदक का फॉर्म भेज देगा। अफसर संबंधित आवेदक के घर जाकर ऑनलाइन ही जांच प्रक्रिया पूरी कर पासपोर्ट कार्यालय को भेज देंगे। महज दो दिन का समय पुलिस अफसरों को दिया जाएगा। पहले बीस दिन का समय थानों के पुलिस अफसर को जांच के लिए मिलता था।

Courtesy: http://epaper.jagran.com/ePaperArticle/01-jan-2017-edition-Bokaro-page_10-9457-4169-181.html


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