खूंटी (08/01/2017): नक्सली कुंदन पाहन के भाई डिम्बा पाहन ने खूंटी में सरेंडर किया

District: Khunti Date: 07/01/2017 Nature of Work:Achievement Against Naxals

भाकपा माओवादी की रिजनल कमेटी का मेंबर और जोनल कमांडर डिम्बा पहान ने शनिवार को खूंटी में डीआईजी आरके धान और अन्य पुलिस अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। डिम्बा संगठन में लगभग 18 वर्ष से सक्रिय था। उसपर सरकार ने 15 लाख रुपये का इनाम रखा था।

आत्मसमर्पण के बाद डीआईजी आरके धान ने उसे इनाम की राशि 15 लाख रुपये का चेक सौंपा। आत्मसमर्पण करने के तत्काल बाद डिम्बा ने कहा कि अब माओवादी अपने सिद्धांत से भटक गए हैं। लेवी वसूलना, मुखबिरी का आरोप लगाकर लोगों की हत्या करना, जन अदालत नहीं लगाकर सीधी कार्रवाई करना ही नक्सलियों का काम हो गया है। इन्हीं कारणों से वह आत्मसमर्पण करने को विवश हुआ।

डीआईजी ने कहा कि डिम्बा को सरकार द्वारा घोषित आत्मसमर्पण नीति के तहत मिलने वाली सुविधाएं और लाभ दिए जाएंगे। एसपी अश्विनी सिन्हा ने बताया कि अड़की थाना क्षेत्र के बारीगड़ा निवासी डिम्बा पहान 1998 में संगठन से जुड़ा था। माओवादी गतिविधियों को लेकर वह चार बार जेल भी जा चुका है। 2008 में जेल से निकलने के बाद फिर से संगठन से जुड़ा और उसके बाद कभी पकड़ा नहीं गया। उसके खिलाफ खूंटी जिले में लगभग 18 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा रांची एवं आसपास के जिलों में भी कई मामले दर्ज हैं।

एसपी के अनुसार वह इंस्पेक्टर फ्रांसिस इंदवार, विधायक रमेश सिंह मुंडा और बुंडू एसडीपीओ प्रमोद कुमार हत्याकांड में भी शामिल था। हालांकि डिम्बा पहान ने एसपी की बातों का खंडन करते हुए कहा कि इन घटनाओं के दौरान वह जेल में बंद था। मौके पर सीआरपीएफ डीआईजी राजीव राय, एएसपी अनुराग, एसडीपीओ रणवीर सिंह भी उपस्थित थे।

कुंदन और श्याम को भी मुख्य धारा से जोड़ने का करूंगा प्रयास: डिम्बा पहान बारीगड़ा निवासी डिम्बा पहान छह भाइयों में सबसे बड़ा है। छह भाइयों में उनके साथ-साथ छोटा भाई श्याम पहान और सबसे छोटा भाई कुंदन पहान भी माओवादियों में चर्चित नाम हैं। डिम्बा ने पत्रकारों से कहा कि वह अपने दोनों भाई श्याम पहान और कुंदन पहान को भी मुख्य धारा में लौटाने का प्रयास करेगा। मौके पर उसने अन्य माओवादियों को भी मुख्य धारा से जुड़ने की अपील की।

 

Courtesy: http://www.livehindustan.com/news/ranchi/article1-naxali-kundan-pahans-brother-dimba-surrendered-in-khunti-656964.html

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