आइपीसी के प्रचलित नियमों का होगा अनुवाद

रांची : स्थानीय थानों में सामान्य तौर पर प्रचलित भारतीय दंड विधान (आइपीसी) के विविध नियमों का स्थानीय भाषा में अनुवाद होगा। इस दायित्व का निर्वहन जनजातीय कल्याण शोध संस्थान (टीआरआइ) करेगा। परिषद के अध्यक्ष सह राज्य के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कल्याण विभाग को इस दिशा में कार्रवाई करने को कहा है। झारखंड जनजातीय परामर्शदातृ परिषद (टीएसी) की पिछले दिनों हुई बैठक में परिषद के सदस्यों ने इस दिशा में मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया था। उनका कहना था कि थानों में स्थानीय भाषा-भाषी अधिकारी नहीं होने की वजह से ग्रामीणों के साथ पुलिसकर्मियों को संवाद स्थापित करने में दिक्कत होती है। कमोबेश ग्रामीणों को भी इन्हीं परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। नतीजतन अनुसंधान कार्य में दिक्कतें आती है। इस पर गृह सचिव जेबी तुबिद ने स्पष्ट किया कि सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है। स्थानीय भाषा-भाषी दस हजार सिपाहियों की नियुक्ति थानों में की गई है। थानों में नियुक्त चौकीदार सामान्य तौर पर स्थानीय नागरिक ही होते हैं।

Courtesy: Dainik Jagran 14.03.2012


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