खूंटी से अपहृत तीनों जवान सकुशल मुक्त

भाजपा सांसद करिया मुंडा के तीन अंगरक्षकों को पुलिस ने रिहा करा लिया है जिन्हें खूंटी में मंगलवार को पत्थलगड़ी समर्थक उपद्रवियों ने अगवा कर लिया था। रांची के पुलिस उपमहानिरीक्षक एवी होमकर ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीनों पुलिसकर्मी सुरक्षित हैं। उन्हें रिहा कराये जाने से संबंधित विस्तृत जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संवाददाता सम्मेलन में देंगे।

पत्थलगड़ी समर्थकों ने सांसद आवास से अपहृत चारों पुलिस जवानों को किया रिहा, तीनों इंसास रायफल, मैगजीन और वर्दी बरामद

खूंटी: सांसद कड़िया मुंडा के आवास से अपहृत चारों पुलिस जवान विनोद केरकेटटा,सियोन सुरीन,सुबोध कुजूर एवं नागेंद्र कुमार सिंह की 62 घंटे के बाद सकुशल वापसी हो गयी है। शुक्रवार की अहले सुबह पत्थलगड़ी समर्थको ने पुलिसिया दबाव में सैको थाना क्षेत्र के उलिहातू मार्ग में रिहा कर दिया। वहीं लूटे गये तीनों इंसास रायफल,मैगजीन व वर्दी भी शाम में घाघरा गांव से बरामद कर लिया गया। गांव के बाहर पुवाल में छुपाकर रखा हुआ था। साथ ही पुलिस ने भारी मात्रा में पोस्ता भी बरामद की है।

हथियार की बरामदगी के लिए घाघरा गांव में एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा के नेतृत्व में डोर-टू-डोर सर्च अभियान चलाया गया। उपायुक्त सूरज कुमार एवं डीआईजी एबी होमकर की उपस्थिति में आईजी नवीन कुमार सिंह ने शुक्रवार दोपहर एसपी ऑफिस में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर जवानों की सकुशल वापसी की जानकारी दी। आईजी नवीन कुमार सिंह ने बताया कि शुरू में तीन जवानो के अपहरण की बातें सामने आयी थी। चौथे जवान नागेंद्र कुमार सिंह तबीयत खराब होने के कारण पानी पीने के लिए सांसद के आवास में चला गया था। इसी दौरान सांसद आवास के समीप पत्थलगड़ी समर्थको के साथ झड़प हो गयी थी। इसके कारण जवान नागेंद्र सिंह फंस गया। बाद में पत्थलगड़ी समर्थक सांसद के आवास पहुंचकर जवान नागेंद्र समेत सांसद के तीन हाउस गार्ड को उठाकर ले गये थे। साथ ही हाउस गार्ड के तीन इंसास रायफल व लोडेड मैगजीन भी ले गये थे।

आईजी ने बताया कि कोचांग गैंग रेप के आरोपियों की तलाश में 25 जून को उदबुरू में छापेमारी की गयी थी। इसके अगले दिन 26 जून को घाघरा गांव में पत्थलगड़ी का कार्यक्रम था। पुलिस को सूचना मिली थी कि विभिन्न कांडो के आरोप पत्थलगड़ी समारोह में शामिल होने पहुंचे हुए हैं। इसी को लेकर पुलिस टीम घाघरा गांव जा रही थी। जिन्हे पत्थलगड़ी समर्थको ने कड़िया मुंडा के गांव चांदीडीह में पुलिस टीम को बंधक बनाने का प्रयास किया था। इसी के बाद वहां समर्थको के साथ पुलिस की झड़प हुई थी। बाद में पत्थलगड़ी समर्थको ने सांसद के आवास से चार पुलिस जवानों का अपहरण कर घाघरा गांव ले गयी थी। जहां भरी सभा में पत्थलगड़ी के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से मात्र तीन जवान को अगवा कर लाने की बात स्वीकारी थी। इसी से प्रशासन को लगा कि तीन जवान ही अपहृत हुए है। आईजी नवीन कुमार सिंह ने बताया कि भले ही जवानों की सकुशल वापसी हो गयी है, लेकिन पुलिस का यह अभियान अगले आदेश तक चलता रहेगा। हमारे जवान अभी भी ग्रामीण इलाको में सर्च अभियान चला रही है। अपहरण की घटना के बाद से ही लगभग 2500 जवान अपहृत जवानों की तलाश में दिन रात छापेमारी कर रही थी। इससे पत्थलगड़ी समर्थक घबरा गए और शुक्रवार की सुबह रिहा करने में मजबूर हो गए।

पत्थलगड़ी समर्थकों ने अपहृत जवानों को सैको थाना क्षेत्र के उलिहातू मार्ग में पीड़ीटोली के पास शुक्रवार की अहले सुबह तीन बजे रिहा किया। चारों जवान चार किमी पैदल चलकर साढ़े तीन बजे सैको थाना पहुंचे। उस वक्त थाना में संतरी के रूप में तैनात जवान सुभित कुजूर ने बताया कि वे थाना के छत में थे। उन्हे साढ़े तीन बजे के करीब उलिहातू मार्ग की ओर से चार लोग आते दिखे। जब उसने टार्च मारी तो चारों ने हाथ उठा दिया और आगे बढ़ते रहे। जब चारों लोग करीब आए तो खुद को अपहृत जवान बताते हुए रिहा करने की बात बताई। इसके बाद थाना का गेट खोला गया। चारों को बैठाया गया। थाना प्रभारी समेत अन्य जवानों ने चारों से पूछताछ की। इसके बाद चार बजे के करीब इसकी सूचना एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा को दी गयी।

सूचना मिलते ही एसडीपीओ और बाहर से आए डीएसपी ने सैको थाना पहुंचकर चारों जवानों को खूंटी ले गए। सकुशल वापस आये जवानों ने सैको थाना के जवानों को बताया कि उन्हें 10-15 लोग आंख में पट्टी बांधकर उलिहातू रोड में लाकर छोड़ दिया और उन्हें बताया कि तीन चार किमी आगे सैको थाना है। वहां जाकर सकुशल वापसी की जानकारी दे देना। जवानों को यह भी बताया कि पत्थलगड़ी समर्थक उन्हें जहां भी ले जाते थे आंख में पटटी बांधकर ले जाते थे। इसलिए वे लोग कहां कहां रहे इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि अपहरण के बाद सबसे पहले घाघरा गांव ले गए और वहां के स्कूल में कैद कर दिया गया। पुलिसिया कार्रवाई के बाद सभी पत्थलगड़ी समर्थक घबरा गए और रात में ही उन चारों को आंख में पट्टी बांध कर कहीं ले गये। अपहृत जवानों ने बताया कि उसके साथ हर समय 20-25 लोग रहते थे।

क्या है पत्थलगड़ी?

पत्थलगड़ी आदिवासी समाज की परंपरा है, जिसके जरिए से गांव का सीमांकन किया जाता है, लेकिन अब इसी की आड़ में गांव के बाहर अवैध ढंग से पत्थलगड़ी की जा रही है। पत्थर पर ग्राम सभा का अधिकार दिलाने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों (आर्टिकल) की गलत व्याख्या करते हुए ग्रामीणों को आंदोलन के लिए उकसाया जा रहा है।

Courtesy: https://www.bhaskar.com/jharkhand/ranchi/news/policemen-have-been-rescued-by-jharkhand-police-in-khunti-5905771.html


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