वियतनामी सेना के ट्रेनिंग मैनुअल का हिंदी अनुवाद है नक्सली दस्तावेज

रांची: पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों से भिडऩे के लिए नक्सलियों ने अब नई आक्रामक तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इस बात का खुलासा झारखंड के अति नक्सल प्रभावित जिले लातेहार में बीते नवंबर को एक माओवादी कैंप से बरामद दस्तावेजों से हुआ है। नक्सलियों के खिलाफ अभियान से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह दस्तावेज वियतनामी सेना के ट्रेनिंग मैनुअल से लिया गया है जिसका बाद में हिंदी अनुवाद हुआ है। उनके मुताबिक, नक्सलियों की यह आक्रामक तकनीक इससे पहले कभी नहीं देखी गई थी। अधिकारी के मुताबिक, वियतनाम का ट्रेनिंग मैनुअल 'जनरल वो न्यूएन' के युद्ध के तरीकों से मेल खाता है। इसका इस्तेमाल वियतनाम ने 50 के दशक में फ्रांसीसी सेना के खिलाफ किया था। जनरल न्यूएन को गुरिल्ला युद्ध के लिए सबसे बेहतरीन रणनीतिकार माना जाता था। यहां सुरक्षाबलों के थिंक टैंक में खतरे की घंटी इसलिए बज उठी है, क्योंकि नक्सलियों की तुलना में उनका ट्रेनिंग मैनुअल कमजोर है। इस तरह का एडवांस ट्रेनिंग मैनुअल अमेरिकी सेना का भी नहीं है। पुलिस अधिकारी ने कहा, हमने न कभी ऐसी तकनीक देखी और न सुनी।

इसीलिए पकड़ में नहीं आते घायल नक्सली

बरामद नक्सली दस्तावेज में गुरिल्ला युद्ध के दो तरीको को चित्रों के साथ दर्शाया गया है। इसमें से एक 'वुंडेड लेग क्रॉल' यानी जख्मी पैर के साथ रेंगना है। इसमें उस अवस्था और तकनीक को बताया गया है, जिसमें मुठभेड़ के दौरान अगर एक पैर जख्मी हो जाए तो कैसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचा जा सकता है। जख्मी पैर को दूसरे पैर के ऊपर रखा जाता है। इस दौरान हथियार को भी एक खास पोजिशन में रखा जाता है, जिससे रेंगने में मदद मिल सके। अधिकारी ने बताया कि शायद इसी वजह से घायल नक्सली पकड़ में नही आते। उन्होंने कहा कि 14 नवंबर 2012 को ही हम एक नक्सली का शव बरामद कर पाए थे। अन्यथा नक्सली कभी अपने पीछे अपने साथियों के शव नहीं छोड़ते। मैनुअल में बताए गए इस तरीके को देश में किसी भी बल को नहीं सिखाया जाता है।

रात में हमले की रणनीति है 'किटेन क्रॉल'

सुरक्षाबलों ने कभी 'किटेन क्रॉल' के बारे में भी कभी नहीं सुना। नक्सली दस्तावेज में इसे रात में हमला करने के लिए सबसे बेहतरीन माना गया है। इसमें न तो आवाज होती है और गोलियों की बौछार के सामने आने से भी बचा जा सकता है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, इस आधुनिक तकनीक को तब इस्तेमाल में लाया जाता है, जब रेंगने के लिए जगह कम होती है। साथ ही इसमें सामने से हमला करने के बजाए दुश्मनों के समानांतर रहकर उन्हें निशाना बनाया जाता है। वियतनामी सेना के इस तरीके को नक्सली कैंप पर कब्जा करने के दौरान सुरक्षाबलों ने भी महसूस किया।

Courtesy: bhaskar.com 05.03.2012


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