पलामू (16/07/2018): पांच लाख का इनामी नक्सली गिरफ्तार

District: 
Date of Achievement: 
16/07/2018
Nature of Work: 
Achievement Against Naxals

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पलामू : पलामू पुलिस ने माओवादियों के सब जोनल कमांडर सुरेंद्र यादव उर्फ सुकेश उर्फ विंदेश्वर यादव को गिरफ्तार कर लिया है। एसपी इंद्रजीत महथा ने सोमवार को यह जानकारी दी। सुरेंद्र पर पांच लाख का इनाम घोषित है। वह झारखंड-बिहार के सीमावर्ती इलाके में डेढ़ दशक से सक्रिय था। वह आठ बड़ी नक्सली वारदातों में शामिल था।

एसपी ने बताया कि सुरेंद्र को रविवार शाम नौडीहा के मायापुर और नासों गांव के बीच से हुई। सूचना मिली थी कि वह अपने गांव आनेवाला है। सूचना पर एसएसपी (अभियान) अरुण कुमार सिंह के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने नाकेबंदी की थी। शाम में एक व्यक्ति आता दिखा। जब उसे रुकने को कहा गया, तब वह भागने लगा। जवानों ने दौड़ा कर उसे पकड़ लिया।सुरेंद्र को सोमवार को जेल भेज दिया गया।

पलामू पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए माओवादियों के सब जोनल कमांडर सुरेंद्र यादव कम से कम आठ बड़ी वारदातों में शामिल था। एसपी इंद्रजीत महथा ने यहां सोमवार को बताया कि सुरेंद्र ने पुलिस के सामने इन वारदातों में अपनी अंतर्लिप्तता स्वीकार की है।

सुरेंद्र यादव ने स्वीकार किया है कि 2009 में 12 दिसंबर को तत्कालीन छतरपुर और वर्तमान में नौडीहा थाना क्षेत्र के सरईडीह में दिनेश सिंह और उनकी पत्नी की हत्या करने और उनके घर को विस्फोटक से उड़ाने की घटना में वह शामिल था। उल्लेखनीय है कि दिनेश सिंह और उनकी पत्नी का जला हुआ शव मकान के मलबे से बरामद हुआ था। साथ ही दंपति का घटनास्थल से अगवा कर लिये गये एक बेटे का शव भी बाद में जंगल से बरामद हुआ था।

एसपी ने बताया कि सुरेंद्र यादव ने 2005 में नौडीहा थानाक्षेत्र में अजय चौधरी के घर की कुर्की के विरोध में स्थानीय चौकीदार को घर से निकालकर उसके साथ मारपीट करने, 2005 में ही नौडीहा बाजार में स्थित पुलिस आउट पोस्ट पर रात में हमला कर जवानों को रहने के लिए बनाये गये भवन को उड़ाने, 2006 में नौडीहा थानाक्षेत्र के ललगढ़ा के मंजुराही पहाड़ पर पुलिस के साथ मुठभेड़ में शामिल रहने, 2009 में नौडीहा थानाक्षेत्र के कुहकुह कला विद्यालय को विस्फोटक से उड़ाने, 2010 में नौडीहा बाजार थाना के डगरा मध्य विद्यालय के बगल में एक व्यक्ति की हत्या करने, 2015 में नौडीहा बाजार थाना के सरईडीह में मोबाइल टॉवर को जलाने तथा 2017 में नौडीहा बजार थाना के विजयगीर पहाड़ पर पुलिस के साथ मुठभेड़ में शामिल होने की बात स्वीकार की है।

अगले दस वर्ष तक बेहतरीन काम की जरूरत: माओवादी सुरेन्द्र से पूछताछ के बाद एसपी ने बताया कि उग्रवादी प्रभावित क्षेत्रों में अगले 10-12 वर्षो तक बेहतरीन पुलिसिंग की जरूरत है। पुलिस को जनता के साथ और निकटता का संबंध बनाने की चुनौती है। कहा कि सुरेंद्र यादव से पूछताछ में यह बात सामने आयी है कि माओवादियों का दस्ता फिलवक्त पलामू में नहीं है, परंतु संगठन को लेकर चर्चा का दौर लगातार जारी है। माओवादी ग्रामीणों से जुड़ने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए पुलिस को ज्यादा से ज्यादा गतिविधि बढ़ाने, गांव-गांव तक पहुंचने, विकास को गति देने का कार्य अगले 10-12 वर्षो तक करने की जरूरत है। उसने बताया कि पुलिस की लगातार कार्रवाई से घर के लोग भी काफी दबाव में थे।

शुरुआत में उसे .303 राईफल दी गयी। बाद में इंसास राईफल में प्रमोशन हुआ। बाद में वह माओवादियों के मध्य जोन के उतरी सबजोन को कमांड भी करने लगा था। वह संदीप यादव, नीतेश यादव, अभिजीत यादव, कुंदन यादव, सरेंडर करने वाले गोविंद उर्फ एनुल के दस्ते में काम किया है। उसने बताया है कि नौडीहा ओपी पर हमला के दौरान करीब 70 की संख्या में माओवादी पहुंचे थे। तब के हरेक घटना में 70-80 माओवादी शामिल रहते थे परंतु वर्तमान में माओवादियों का सशस्त्र दस्ता क्षेत्र में नहीं है। सुरेन्द्र के स्वीकारोक्ति बयान के अनुसार एसपी ने बताया कि उसका कार्यक्षेत्र एनएच-98 से लेकर डुमरिया तक था परंतु कोठीला, चोरहा, योगनी आदि क्षेत्र में भी आता-जाता था। मारा गया माओवादी कमांडर अजय यादव के दौर में वह महुदंड इलाके में भी जाता-जाता था। वह एक बार गिरफ्तार होकर औरंगाबाद जेल जा चुका है। उसने यह भी बताया है कि उसे जरूरत का सामान और पैसा माओवादी विनय यादव से मिलता था। लेवी वसूली का काम सबजोनल सचिव किया करता था।

पढ़ने में शुरू से कमजोर सुरेन्द्र जब सातवां में था, तब उसे पढ़ाई में एकदम मन नहीं लगता था। इसके कारण परिजनों ने 2000 में नामुदाग में शादी कर दी थी जिससे उसे एक बेटा और बेटी भी हुई थी। परंतु बाद में उसकी पत्नी का निधन हो गया। इसके बाद उसने छतरपुर में शादी की और फिर बाद में डुमरिया में शादी की। पुलिस के समक्ष स्वीकारोक्ति बयान में उसने स्वीकार किया है कि पुलिस का दबाव बढ़ने के बाद वह डुमरिया वाली पत्नी के पास ही ज्यादा रहता था परंतु नासो आता-जाता रहता था। उसने बताया है 2003-04 में उसके गांव में माओवादियों का आना-जाना लगा रहता था। इसी दौरान वह उनके संपर्क में आया। जयंत यादव उर्फ रतन यादव दस्ते का लीडर हुआ करता था जिसके लिए शुरुआत में वह बाजार से जरूरत के सामान पहुंचाने का काम किया करता था। परंतु बाद में वह कमल यादव के नेतृत्व वाली पीएलजीए दस्ते में शामिल हो गया।

Courtesy: https://www.livehindustan.com/jharkhand/ranchi/story-five-lakh-prized-naxalite-arrested-in-palamu-2073505.html

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